रस्ते का कांटा न बनू मै फूल बनू तेरे दामन का
दौलत का भूंका न बनू मै भक्त बनू तेरे आँगन का
न लालच माया मोह रहे न प्यासी तन की काया हो
बस इतना ही चाहूं कान्हा मै दास बनू मनभावन का ........................
न मै तुझसे बोलू और न तू मुझसे बोल
प्रेम की भाषा प्रेम ही जाने न शब्दों से तौल
अधरों से मुस्कान दिखे और हो नैनो से बात
हो दिल से दिल की बातें पट घूँघट को तो खोल
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